आँखों के चेकअप को टालना क्यों 'सबसे बड़ी ग़लती' है? (साल में कितनी बार जाना है डॉक्टर के पास)
देखो, हम सब एक-दूसरे की नक़ल करते हैं—जिम जाने की, डाइट करने की—लेकिन सेहत के ज़रूरी काम, जैसे आँखों का चेकअप, टालते रहते हैं!
आप ईमानदारी से बताओ, आख़िरी बार आँखें कब चेक कराई थीं? जब चश्मे का नंबर इतना बढ़ गया कि बोर्ड दिखना ही बंद हो गया? है ना?
लेकिन, एक डॉक्टर होने के नाते, मैं बता दूँ कि आँखों की जाँच सिर्फ़ चश्मा बदलने के लिए नहीं होती। यह आपके शरीर के अंदर झाँकने का एक सुपरपावर है।
आइए, दो मिनट में समझते हैं कि आपको इस काम को कितनी बार अपनी टू-डू लिस्ट में डालना है।
1. पहले, जल्दी से ये टाइमटेबल देख लो:
हम जैसे तंदुरुस्त और जवान लोग (यानी 18 से 64 साल वाले) अगर बिल्कुल फिट हैं, तो हर 1 या 2 साल में एक बार डॉक्टर को दर्शन करा देना काफ़ी है।
मगर, अगर आप 65 पार कर चुके हैं, तो प्लीज़, प्लीज़, हर साल जाना ही जाना है। उम्र के साथ पर्दे (रेटिना) और नसें कमज़ोर होने लगती हैं, इसलिए रिस्क नहीं लेना है।
लेकिन हाँ, एक बात गांठ बांध लो: अगर आपको शुगर (Diabetes) है, बीपी (High BP) की दिक्कत है, या आपके परिवार में किसी को समलवाई और काला मोतिया (Glaucoma) रहा है, तो आपको बिना नागा हर साल आँखें चेक करानी ही करानी हैं! इसमें कोई आलस नहीं चलेगा।
2. डॉक्टर आपके शरीर में क्या 'जासूसी' करते हैं?
सुनकर हैरानी होगी, पर आपकी आँखें एक तरह से शरीर का आईना होती हैं। डॉक्टर यहाँ क्या देखते हैं:
डायबिटीज़ का सिग्नल: आपको पता भी नहीं होता, लेकिन अगर आपकी शुगर बढ़ी हुई है, तो आँखों के पर्दे की नसें फूलने या रिसने लगती हैं। डॉक्टर को यह सबसे पहले दिख जाता है।
बीपी और कोलेस्ट्रॉल: आँखों की पतली नसें, हाई बीपी की वजह से सिकुड़ जाती हैं। कई बार, कोलेस्ट्रॉल का जमाव भी आँखों में नज़र आ जाता है। सोचो, आपको दिल की बीमारी से पहले आँखों का डॉक्टर बचा सकता है!
'चुपके से आने वाली' बीमारियाँ: ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) एक ऐसी चोर बीमारी है जो बिना बताए धीरे-धीरे रोशनी चुराती है। जब तक आपको पता चलता है, नुक़सान हो चुका होता है। इसे सिर्फ़ डॉक्टर ही चेकअप में पकड़ सकते हैं।
3. रोज़ की थकान से आज़ादी
और हाँ, छोटी-छोटी दिक्कतें तो हैं ही—जैसे सिर दर्द, आँखों में जलन, रूखापन (Dry Eyes)। ये सब ज़्यादातर ग़लत नंबर के चश्मे या लगातार स्क्रीन देखने से होता है। सही टाइम पर चेकअप कराओगे, तो डॉक्टर सही पावर का चश्मा या आई ड्रॉप्स देंगे, और ये रोज़ की थकावट चुटकियों में दूर हो जाएगी।
आख़िरी बात :
Dr. Vertika Kulshrestha
अपनी आँखों को 'सेकेंडरी' मत समझो। जब तक आप साफ़ देखते हो, तब तक दुनिया रंगीन है। इंतज़ार मत करो कि चीज़ें धुँधली हों। अभी जाओ और अपनी अगली अपॉइंटमेंट बुक करो। वादा करो!